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All News Social कविता पुस्तक समीक्षा राजनीति संस्मरण सामयिक विमर्श साहित्यिक
  • Sep 04, 2026
  • By शालिनी राय 'डिम्पल'

स्त्री अब वह नहीं रही

यह कविता स्त्री की अस्मिता, आत्मसम्मान और चेतना की यात्रा को अभिव्यक्त करती है। पुरुष की वासनात्मक दृष्टि के सामने स्त्र...

  • Sep 01, 2026
  • By शालिनी राय 'डिम्पल'

मनुष्य बचे रहना चाहिए

‘मनुष्य बचे रहना चाहिए’ कविता आधुनिक तकनीकी जीवन में घटती मानवीय संवेदनाओं, कमजोर होते रिश्तों और बढ़ते अकेलेपन को उजागर...

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