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भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था (Bhartiya Samvidhan Mein Aarakshan Ki Vyavastha)

"सामाजिक न्याय और संवैधानिक आरक्षण की सार्थक व्याख्या"

(3)
by रामाश्चर्य यादव (Ramashcharya Yadav)
₹150

"भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था" रामाश्चर्य यादव की एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक कृति है, जो संविधान में निहित आरक्षण संबंधी प्रावधानों,

उनके उद्देश्य और सामाजिक महत्व का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के उत्थान में आरक्षण की 

भूमिका को स्पष्ट करती है। संविधान, राजनीति और सार्वजनिक नीति में रुचि रखने वाले पाठकों एवं शोधार्थियों के लिए यह एक उपयोगी संदर्भ-ग्रंथ है।

भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक रामाश्चर्य यादव द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण वैचारिक पुस्तक है। यह कृति भारतीय

संविधान में निहित आरक्षण संबंधी प्रावधानों, उनके उद्देश्य, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा सामाजिक महत्व पर केंद्रित है।

 

पुस्तक का संकलन एवं संपादन उनके पुत्र कृष्णकांत यादव द्वारा किया गया है। इसमें संविधान निर्माताओं की दृष्टि, सामाजिक न्याय की अवधारणा तथा 

वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण की भूमिका का विवेचन किया गया है। साथ ही, आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रश्नों और समकालीन

बहसों पर भी विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

 

भारतीय समाज में समान अवसर, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के संदर्भ में आरक्षण की भूमिका को समझने के लिए यह

 पुस्तक एक उपयोगी एवं विचारोत्तेजक अध्ययन सामग्री है। सामाजिक न्याय, संविधान, राजनीति तथा सार्वजनिक नीति में रुचि रखने वाले पाठकों,

 विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ सिद्ध होती है।

किताब का नाम : भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था
रचनाकार : रामाश्चर्य यादव
पृष्ठ : 72 (पेपरबैक)
मूल्य : ₹150
श्रेणी : राजनीतिक एवं सामाजिक अध्ययन

कीवर्ड : राजनीति, आरक्षण, भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय, उत्तर प्रदेश, समाजवाद, समान अवसर, लोकतंत्र

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